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सागर की लहरों से टकराकर आगे बढ़ना सीखा है









सागर की लहरों से टकराकर आगे बढ़ना सीखा है,
मैंने खुद से ठोकर खा कर आगे बढ़ना सीखा है,
अंजाम बुरा क्या हो सकता है ,अब क्या बाकी है सीखने को,
लड़ लड़ कर औरों से थक कर अब खुद से लड़ना सीखा है
सागर की लहरों से टकराकर आगे बढ़ना सीखा है।। 1।।




मैं जीता हूं या हारा हूं अब फर्क नहीं पड़ता इससे
माना कि दर्द बहुत है पर अब कहने भी जाऊं मैं किससे,
ये दुनिया बेगानी है बस अपनी ही धुन गाती है ,
औरों से बातें कर करके थक कर
अब खुद से बातें करना सीखा है,
सागर की लहरों से टकराकर आगे बढ़ना सीखा है।। 2।।




जब तक तुम थी तुम ही मेरी दुनिया थी
सब कुछ था मेरी दुनिया में माना कि कुछ कुछ कमियां थी
लौटेगी की एक दिन सोच सोच कर कितने वक्त गवाए थे
गलत था मैं जो अपना समझा तुम अपने नहीं पराए थे
हरपल आशाओं को दफना कर दिल में
मैंने तुझ बिन जीना सीखा है ,
सागर की लहरों से टकराकर आगे बढ़ना सीखा है।। 3।।




मेरी तन्हाई अक्सर तुमको ढूंढा करती है
जब थक जाती है ढूंढ ढूंढ कर तो मुझसे बातें करती है
कहती है उसको भूल बढ़ो आगे कुछ काम करो
क्या प्रेम प्रेम रट ले बैठे हो-
-उठो बढ़ो जग में थोड़ा कुछ नाम करो
इन बकबक से थक कर फिर हम दोनों ही सो जाते हैं
फिर सूरज की अगली किरणों संग हम उतने ही तेरे हो जाते हैं
क्या कहे तुझसे कितनी मुश्किल से
इस तन्हाई से बातें करना सीखा है,
सागर की लहरों से टकराकर आगे बढ़ना सीखा है।। 4।।


Deshaj | देशज | top motivational poem

                      kavia in video                                       DESHAJ-  34:52'' - 37:17'' 

 

फलक पर सूरज दस्तक दे रहा है

शायद नये सबेरे का आगाज है

उठो शामिल हो जाओ नव निर्माण में

ये तुम्हारी आने वाली नस्लों की अरदास है

उगते सूरज सा तेज रखो तुम

छा विश्व पटल पर चहुँ ओर खुद कीर्तिमान बन जाओ

तपती दोपहरी सा मेहनतकश हो

आंख दिखा न सके कोई वो यशोज्ञान तुम बन जाओ

जड़ता को करके निरामूल तुम क्षमता अपनी पहचानो

कर नाश चराचर अंधकार वो प्रखर ज्ञान तुम बन जाओ

परवान चढ़ो तुम भी चढ़ते सूरज सा

पर अहंकार की छाया को अपनी छाया में न दो विश्राम

हर रोज क्षितिज के पशिचम में सूरज करता घर में विश्राम

हे मानवता के द्योतक सम्पूर्ण चराचर के प्रहरी

तुम ही मानवता तुम ही मानव तुम ही हो गीता के ज्ञान

तुम विश्व धरोहर शांति सरोवर तुम ही सभ्यता के अग्रज हो

तुम ही हो विश्व तुम्ही भारत तुम अपने देशों के देशज हो