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हो जाने दो फैसला

 

हो जाने दो फैसला जो कुछ भी हो,

हम भी हवाओं से उड़ना सीख आए हैं ।

माना कि चिन्गारियों से आग लगाने का हुनर रखती है वो,

हम भी समंदर से दरिया सुखाने का हुनर सीख आयें हैं।।


माना की खाक कर सकती है मुझे,

अपने आगोश में समेट कर गम नहीं,

हम भी जल जल के बुझने का हुनर सीख आयें हैं।।


माना कि दूर से ही वो आग लगा देगी,

हो सकता है कि लाखों को वो झुलसा देगी ।

समंदर को भी वो सुखाने की कोशिश करेगी बार बार,

पर हम भी पानी में आग जलाये रखने का हुनर सीख आयें हैं।।

                                                                 - सर्वेश यादव



Best Hindi Shayari | बेस्ट हिंदी शायरियां

     


                              


         



                                  *****

मुसाफिरों की चहलकदमी बढ़ रही है
मेरी गली में गर्मी बढ़ रही है
कुछ खास बात है आजकल गली के उस मकान की
मेरी नजर भी आजकल कुछ तिरछी पड़ रही है
       

                                  *****


हो जाने दो फैसला जो कुछ भी हो
हम भी हवाओं से उड़ना सीख आए हैं
माना कि चिन्गारियों से आग लगाने का हुनर रखती है वो
हम भी समंदर से दरिया सुखाने का हुनर सीख आयें हैं।।


माना खाक कर सकती है मुझे अपने आगोश में समेट कर
पर हम भी जल जल के बुझनेे का हुनर सीख आयें हैं।।


माना कि  दूर से ही वो आग लगा देगी
हो सकता है कि लाखों को वो झुलसा देगीस

मंदर को भी वो सुखाने की कोशिश करेगी बार बार

पर  हम भी पानी में आग जलाये रखने का हुनर सीख आयें हैं।।


                                    *****


सुना है लोग पीके दर्द भुला देते हैंकै

से हैं वो लोग जो खुद को जला देते है

बुजदिल है वो लोग आज तक मैं यही समझता रहा

अब पता लगा है कि शेर दिल है वो जो खुद को सजा देते हैं।।


                                  *****


ज़हीनों की महफिल है ज़हालत से भरी है
आंख उठाकर देख दुनिया खाली पडी़ है
गुमान था तुझे जिसके पाकीज़ा और नायाब होने का
ध्यान से देख वो उस भीड़ में सबसे आगे खडी़ है।।

                                                      -Sarvesh yadav

    

                                 ***********




रात की बात थी आज भी रात है






 हम तो तन्हाइयों में हैं ऐसे जिए
है फख़त रौशनी फिर भी अंधकार है! 
जब भी कोशिश किया कि उजाला लिखूँ
रात की बात थी आज भी रात है!! 
याद है क्या तुम्हे वो पुराना समय
वक्त ही वक्त था तुमको भी हर समय
तुम तलख होती थी गर किसी बात पर
मैं हमेशा मना लेता था उस समय
फिर चहल कदमियां होती थी रात की
बात ही बात होती थी बिन बात के..
क्या हुआ जो अचानक यूँ मुंह मोड़ ली
बात छोड़ी जहाँ थी वहीं आज है
जब भी कोशिश किया कि..................... !! 1!! 


हिंदी शयरिओं को पढने के लिए इसे क्लिक करें


सुबह आई नहीं जिंदगी में मेरे
राह तकते ही तकते शहर हो गया
सूखकर कंठ जैसे कि कांटा हुए
सांस लेना हवा में ज़हर हो गया
आंखों का था भरम जो नदारद हुआ
खोलकर आंख मैं बेसबर हो गया.
छोड़कर मुझको क्या कोई महफ़िल मिली
ख्वाब का एक घर बेशहर हो गया 
राह कटने का अब हमको आसार है
है अकेला सफर थोड़ा दुशवार है.. 
फिर मिलूँगा दोबारा किसी और जहाँ
बात होगी शुरू जो वहीं आज है... 
जब भी......................!! 2!! 


Ye teri mahfil


ये तेरी महफिल है मेरा छोड़ जाना ही सही
घुट घुट कर हंसने से बेहतर है दिल का रोना ही सही
यूं तो तुझे जगाने की हर एक मुमकिन कोशिश कर ली
अब सोचता हूं मेरा सो जाना ही सही
इस कदर तुझसे मोहब्बत की खुद को भूल बैठा
आज सोचता हूं तुझको भूल जाना ही सही
तेरे गम में भी मुस्कुराने का दिखावा करता रहा सालों तक
अब सोचता हूं एक बार खुलकर रो देना ही सही
जानता हूं तुझे भुला देना मुमकिन नहीं ताउम्र पर कब तक
सोचता हूं श्मशान में सोकर तुझे भूल जाना ही सही !!

अंजाम




मासूम था मैं सब कुछ भूल कर टूट कर तुमसे प्यार किया
तुम्हें क्या पता कि कितनों ने मेरे पीठ पीछे वार किया
गम नहीं है उनका क्योंकि वह अपने नहीं थे
पर तुम तो अपने थे ना
फिर तुमने क्यों ऐसा आचार् किया।।
पता है तुम्हे भूलने की जद्दोजहद में मैने खुद को भुला दिया
क्या किया ऐ जिंदगी तूने मुझे रुला दिया।। 1।।

अब ऐसा प्यार नहीं होगा, फिर यह संसार नहीं होगा
देखेगी दुनिया सारी अब ,यह अवतार नहीं होगा
घिस घिसकर रेत बनूं ,मैं ऐसी चट्टान नहीं
जो उड़ा बादलों को ले जाए
मैं ऐसा तूफान नहीं
एहसास नहीं था मुझे प्रेम का जो तेरी नफरत  ने मुझे करा दिया
अब नफरत मैं तुमको सिख लाऊंगा जो तुमने मुझे सिखा दिया पता है तुम्हें भूलने की जद्दोजहद में मैने खुद को भुला दिया
क्या किया ऐ जिंदगी तूने मुझे रुला दिया।। 2।। 

किताबी ज्ञान





कापी किताबों से ज्ञान ये सब दकियानूसी बाते हैं,
असल में ज्ञान तो ये जिन्दगी सिखाती है।
किताबों को पढ़ कर क्लास का टापर बन सकते हो,
जिन्दगी का टापर तो उसकी ठोकरें बनाती हैं।।
समेटते चला चल हर एक ठोकरों को यादों में
समय के साथ साथ ये ही तजुर्बा कहलाती हैं।।
सालों तक पढ़ा जिन्हें किताबों में धुंधला हो जायेगा
आखिर में ठोकरें ही याद आती हैं।।
H²O+so⁴ =h²so⁴ किसी काम नहीं आता
आखिर में जिन्दगी ही नयी राहें दिखलाती है।।
सूरज बनों लोगों के लिए अनुभव साझा करो
चंदा का क्या वो तो सूरज से ही रौशनी पाती है।।
तुझे क्या कहूँ सर्वेश बस ये शरम छोड़ दे,
छुई मुई तो छूने से मुरझा जाती है।।
शेर की तरह एक दिन भी जी ले दुनिया में
ये यादें सारी जिन्दगी सुकून दे जाती हैं।।

तजुर्बा





मेरे मरहूम दिल पर बार बार चोट लगी है,
हर बार सम्भल जाता हूँ,
फिर से उन्हीं रास्तों पर चल पड़ता हूँ,
सीख ले कर पुराने जख्मों से आगे बढ़ जाता हूँ,
वो इंसान ही क्या जिसे कभी दर्द न मिले,
हर दर्द से मैं तो एक नया तजुर्बा पाता हूँ,
सुख ,दुःख जीवन के हिस्से है,
कभी धूप कभी छांव यही सच्चे किस्से हैं,
ये न आये तो जिंदगी को मैं अधूरा पाता हूँ।।
बगैर इनके जीवन में कुछ कहाँ है,
इन्हीं से तो मैं हर बार एक नयी उम्मीद पाता हूँ,
सम्भलना ,गिरना ,चलना और बढ़ते रहना,
इन्सान हूँ न इसलिए इन्हें संजीदगी से निभाता हूँ,
कुछ पाना खोना या चाहत रखना,
इन्सान की आवश्यक कमजोरी है,
कर्म ही है जिससे मैं सुकून पाता हूँ,
कर्म से परे कुछ नही,कर्म के बगैर कुछ भी नहीं,
लोग कुछ भी कहें किस्मत किस्मत किस्मत,
कर्म अच्छा हो तभी मैं किस्मत को साथ पाता हूँ।।
कर्म आवश्यक और चक्रीय आधार है,
पहले वे आज मैं कल कोई और को करना पड़ेगा,
लोग कुछ भी करें या कहें उनका क्या कहना,
पर गर मैं भी कर्म पथ छोड़ दूं तो,
सारी सृष्टि को थमा हुआ पाता हूँ।।
मैं जानता हूँ आज हूँ कल नहीं रहूँगा,
तभी तो हर वक़्त जिन्दगी को अपने पास पाता हूँ,
निराशा समाधान नहीं किसी विफलता का,
आशावादी हूँ तभी तो जिन्दा रह जाता हूँ,
चाहत ,सुख, दुःख ,इच्छा ये सब भौतिकताएं है,
प्रेम में हूँ तभी तो इनसे परे हो पाता हूँ,
प्रेम जीव की अनिवार्य आवश्यकता है,
बगैर प्रेम के मैं इन्सान को इन्सान नहीं पाता हूँ।।
प्रेम क्या है अक्सर लोग पूछ लेते हैं,
प्रेम को मैं स्वयं परिभाषित नहीं कर पाता हूँ,
इतना जानता हूँ प्रेम में इन्सान इन्सान होता है,
हर सुख -दुःख इच्छा आशा से परे होता है,
प्रेम उस जुगुनू की भांति है जो न चाहे,
तो भी प्रकाश ही फैलाता है,
प्रेम में कभी हार या जीत नहीं हो सकती है,
प्रेम में तो इन्सान स्वयं ही प्रेमी और स्वयं ही द्वन्दी होता है,
प्रेम तो हर बंधन और आशाओं इच्छाओं से परे होता है।।
लोग पूछते हैं तुम इतने खामोश क्यों रहते हो आजकल,
उन्हें क्या पता प्रेम में इन्सान स्वयं की सुध खो देता है,
मैं कितना भी उन्हें समझाऊँ पर समझा नहीँ पाता हूँ,
दुखी नहीं हूँ चिन्तन में हूँ कैसे बताऊँ उन सबों को,
मैं जिधर देखता हूँ बस प्रेम ही प्रेम को पाता हूँ,
प्रेम कोई विषय नहीं है वाद विवाद का,
प्रेम तो स्वच्छन्द नजरिया है, जिसे सिर्फ मैं ही देख पाता हूँ।।
लोग कहते हैं मेरा प्रेम अधूरा रह गया,
पर उन्हें क्या पता प्रेम अधूरा या पूरा हो ही नहीं सकता,
नासमझों कि बात को सिर्फ चाहत में ही समेट पाता हूँ,
प्रेम में किसी के होने या न होने का सवाल ही नहीं,
आत्मा से जुड़ जाये तो फिर प्रेम में कोई बवाल ही नहीं,
मैं कौन हूँ क्या हूँ किसी को नहीं पता,
ढूंढता हूँ जब मैं खुद ही नहीं समझ पाता हूँ,
जो भी हूँ जैसा भी हूँ प्रेम का निशान हूँ,
लोग कुछ भी कहें मै कल भी इन्सान था आज भी इन्सान हूँ।।
आप भी इन्सान होने का दावा करेंगे मैं जानता हूँ,
तो चलिए आपको इन्सान होने का पाठ पढाता हूँ,
ईर्ष्या, क्रोध, द्वेष, लोभ, मोह, आशा, निराशा,
चाहत इन्सान की द्वितीयक आवश्यकता है।
प्रेम एक मात्र इन्सान होने की प्राथमिकता है,
अनावश्यक इच्छाएं इन्सान को इन्सानियत से दूर करती हैं,
परे हूँ इन सब से तभी तो इन्सान कहलाता हूँ,
दया, क्षमा, प्रेम हर किसी में कहाँ पाता हूँ,
तभी तो हर किसी को इन्सान नहीं कह पाता हूँ,
मेरे वज़ूद पर खुद मुझे शक है पर पता है,
परे हूँ सारे बन्धनों से तभी तो सर्वेश कहलाता हूँ।।



आसमां रोया है













टूटा है कोई दिल कहीं दूर
आज कोई बेचैन होकर सोया है
बहुत बेब़स रहा होगा वो शख़्स
अकेले में छुप छुप कर रोया है
कोई सूरज अकेला पड़ गया है
कि उसने आज चांद को खोया है
बेतहाशा बेबसी के आलम को महसूस कर लिया उसने
तभी तो आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है।।
भिगो दिया सारी दुनिया को अपने आंसुओं से
गिरफ्त से बाहर आ रहा है उसके गेसूओं से
महताब भी उतना ही बेकरार है शायद
तभी तो कयी रात से बाहर नहीं आया है
आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है............।।
आफा़त था सूरज का कि चांद मुकर गया
ख्वाब जितना भी था सपनों में ही गुजर गया
आराईश महताब की इस कदर बेचैन की
सूरज छुप गया सिर्फ बादलों का साया है
आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है............।।
धुंध भी छाया है बारिश का भी साया है
बादलों के चिलमन में छुपकर कोई देखने आया है
कयामत की रात बन गयी है ये इस कदर
चारों तरफ अंधेरों का सूनसान साया है
मोहब्बत करने में उससे मशगूल रहा इस कदर
टूटा भरम तो दुनिया को खुद से दूर पाया है
आरज़ू थी उसके आगोश में ही जीने मरने की
आशुफ्ता हो गया हूँ खुद को जो उससे दूर पाया है
उसे नहीं पता कि दिल पर कैसा खुमार छाया है
आसमां में बादलों ने अंधेरा बिखेर दिया है
बेबसी देखकर मेरी आसमां ने जमीं को भिगोया है
आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है............।।

#आराईश-सजावट
#आशुफ्ता-बौखलाहट
#आफा़त-दुर्भाग्य

पत्थर और मैं

एक पत्थर को पिघलाने में मैं खुद ही पिघल गया
चला था उसको बदलने मैं खुद ही बदल गया
उस पर तो ज़रा भी शिकन नहीं आई
पर मेरे चेहरे का हुलिया ही बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने............।।
बड़े शौक से उसे अपने मंदिर में सजा रखा था
उसके दीदार को हर वक्त वक्त बना रखा था
क्या पता था कि एक पल में बिखेर देगा सारे सपने
जिसे मैंने उस खुदा से भी बढ़कर खुदा बना रखा था
थोड़ा सा मुस्कुरा के वो तो यूं ही चले गए
उन्हें क्या पता कि मेरे सारे सपने भी ले गए
अभी तक तो हम सिर्फ मुफ्लिशी ही में जी रहे थे
पर एक ही पल में वो लाचार करके चले गए
सोचता हूं अकेले में तो लगता है कुछ बदल गया
आंख बंद करके जो सपने देखते थे
अब तो नजारा ही बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने........।।
जुनून है शायद यह प्यार का टूटेगा नहीं
कोई कितना भी जोर लगा ले
ये सिलसिला अब रुकेगा नहीं
सजदा सिर्फ उसी का किया है और उसी का ही करूंगा
सिवाय उसके ये सर अब कहीं झुकेगा नहीं
सोचता हूं कि उसकी तस्वीर बना दूं
सोच कर ही दिल दहल गया
बड़ी कोशिशों के बाद जो चेहरा उभर कर आया
करीब आकर देखा तो वो चेहरा बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने.......।।
साजिशों के शिकार तो हम बचपन से होते आए
जहां-जहां फूल लगाया कांटे ही उग आए
अब तो कांटों से दोस्ती सी हो गई है
बार-बार चुभने पर भी  होठों से उफ तक ना आए
शीरी फरहाद हीर रांझा का तो जमाना ही बदल गया
सच में ऐसी मोहब्बत थी या किस्सों का कोई कल गया
मुझ पर रहम खाने की कोई जरूरत नहीं है ऐ जिंदगी
ना ही मैं कल बदला था और ना ही मैं आज बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने.............।।
मेरे हाथों में कुछ मर्यादा की ऐसी लकीरें हैं
जिन्हें मिटा नहीं सकता
चाहता हूं सब कुछ उसे बता दूं
बेबसी यह है कि बता नहीं सकता
यह दीवानगी नहीं कि पागल हो जाऊं यह इश्क है
लाख कर ले वो कोशिश पर मैं उसको भुला नहीं सकता सोचता हूं कि कभी ना कभी तो वह कल आएगा
बेचैन तो मैं हूं निसंदेह पर इंतजार में
वो भी बेचैन होगी कभी तो ऐसा कल आएगा
सोचता हूं कि वह कैसे इतना बदल गया
कल तक जो अपना सा लग रहा था
अचानक से बदल गया
सच्चाई नहीं हो सकती है यह यकीन है मुझे
लगता है मानो उसका भी दिल फिसल गया
चाहे तो वह पत्थर सी बना ले खुद को
यकीन है मुझे कहेगी मेरा भी दिल पिघल गया
एक पत्थर को पिघलाने...............।। 

प्यार, मैं और वो..


श़राफत  के चोले में लिपटी है वो ऐसे,
शहद छत्तों में मधुमक्खियों से ढंका हो जैसे।
मेरे पास ऐसा धूआं नहीं है फैला दूं उस पर,
गिर जाये मेरे झोली में गिरता है शहद जैसे।।
मधुमक्खियों से डर नहीं जितना कि शहद से,
डूब जाती हैं तो जान चली जाती है कैसे।।
डर है कहीं पागल न हो जाऊँ उसकी अति से,
घूमने लगूँ न गली गली भिखारियों के जैसे।।
कनक की लत बुरी नहीं होती कितना भी क्यों न हो,
पर कोई खा ले तो पागल हो जाता है जैसे।।
सितारे, चांद कह कर तारीफ करना बेवकूफी लगती है अब,
जब से जान गया हूँ ये खुद बनें हैं कैसे।।
इन्सान है वो निर्जीवों संग तुलना करना नाइंसाफी लगती है अब,
पहचान लेने दो खुद क्या है कौन है कैसे।।
कुछ तो संजीदा कह दो अब प्यार को भी
फूलों संग भौरों के रिश्ते हैं कैसे।।
अकेले अकेले कब तक चलोगे सफर लम्बा है
क्यों न चल कर देखें रेल की पटरियों के जैसे।।
थक जाओगे आ जाओ मेरा सहारा बड़ा चंगा है
चैन से सो पाओगे माँ की गोंद के जैसे।।
काट खाने को बैठे है हर मंजिल पर खूनी दरिंदे
आसान नहीं मानो ये सांप सीढ़ी का खेल हो जैसे।।

मुझे उससे प्यार है

प्यार है, हाँ मुझे उससे प्यार है,
बेइंतहा, बेशुमार उससे प्यार है।
पता है उसे भी पर शायद वो न कहेगी,
फिर भी मुझे उसके कहने का इन्तजार है।।
प्यार है.................
चाहता तो मैं कह देता, पर नहीं कहूंगा,
न कर दी तो भला कैसे सुन सकूंगा।
उसे हक है कुछ भी कहने का,
उसकी अपनी जिंदगी है,
फिर भी मुझे उस पर ऐतबार है।।
प्यार है....................
इतना नादान भी नहीं है वो,
कि मेरे एहसासों को न समझ सके वो।
पता है उसे सब कुछ जानती है वो,
फिर भी उसे न कहने का अधिकार है।।
प्यार है.....................
जब वो बोलती है तो कोयल भी सरमा जाये,
मैं तो बस सोंचता हूँ कि वो फिर से कुछ कह जाये।
याद करने की हर एक मुमकिन कोशिश करता हूँ उसे,
फिर भी उसे यादों से चले जाने का अधिकार है।।
प्यार है.............
लोग पूछते हैं हर रोज उससे बात हुई,
मैं क्या कहूँ उनसे झूठ बोल दूं या सही।
कुछ तो कहते हैं कि कह दो,
नहीं तो किसी और की हो जायेगी।
मैंने कहा कह के तो देखो,
सोचेगी तो मेरा ही नाम बतायेगी।
फिर भी उसे मुझसे छुपाने का अधिकार है।।
प्यार है............
कुछ भी हो कैसी भी है वो,
जैसी भी है अच्छी है वो।
मुझको तो बस इतना पता है,
पहले भी वो मेरी थी, आज भी मेरी है वो।
यकीं न हो तो पूछ लो क्या उसे भी मुझसे प्यार है।।
प्यार है..........
गर सच में कुदरत जैसा कुछ है,
तो उसकी नायाब करिश्मा है वो।
गर मैं गोकुल का कृष्णा हूँ तो,
बरसाने की राधा है वो,
उस दौर में तड़पी वो मेरी विरह में,
इस दौर मुझे तड़पाने का भी उसको अधिकार है।।
प्यार है............




दास्तान - ए- मोहब्बत {daastan e mohhabat}

कायरता है मेरे अंदर
या प्रेम विवशता छायी है
कहना चाहा कह न पाया
वो सामने जब जब आयी है।।
दिन रात उसी की आहें भरता
दिल पल पल उसकी याद में मरता
सुध खोकर बेसुध सा पडा़ हूँ
छोड़ उसे सारी दुनिया,
कितनी हो गयी परायी है
कायरता है...............।।
बेचैनी है दिल में आंखों में कल के सपने हैं
आजाद परिंदे सा उड़ जाते जंजीरों मे जकडे़ हैं
अब तक जिनसे पहचान न हो सकी
हर सपने में वो ही बस अपने हैं।
सोच रहा हूँ अब कह ही दूं तुमको
तुम बिन जीना  दुनियाँ में ,
अब लगती एक बुराई है
कायरता है.......।।
झंझावातों तूफानों को कब कब कितना झेलें हैं,
हुआ नहीं एहसास धरा पर कितने हम अकेले हैं,
मायूसी का ऐसा मंजर, पहले कभी न छाया था,
दर्द गमों को हम क्या जाने न रिश्ते कभी निभाया था
आज मगर अन्धेरों में भी उसकी सूरत दिखती है
कौन कहेगा मैं चलता हूं उसकी आहट मिलती है
रग रग मेरे रोम रोम में ऐसे ही वह समाई है
 कि सारी दुनिया मिलकर ढूंढे फिर भी ढूंढ न पाई है
कायरता है................।।
मेरा शांत चित्त वह चंचल विह्वल अब डूब रहा मैं उसमें पल पल
कभी आशा की इक ज्योति है खिलती कभी कभी बुझ जाती है
है दौर उलझनों का ऐसा
कह रहा हो मानो वो वैसा
अंतर्द्वंदों की बैसाखी में मैं डूब रहा हूं मानो ऐसा
आसान नहीं यह डगर प्रेम की मुश्किल जीना कर देती है
डाल आदतें तू कांटो की भी
बस फूलों की ही चाह ना रख
है योद्धा तू भी इस रण का अब विजयश्री संघ हार का भी स्वाद तू चख
हे वीर धीर गंभीर पुरुष
निष्काम निस्वार्थ निष्पाप कर तैयार तुरूप
हो आशावादी, दृढ निश्चयी
आसान नहीं ये रण
गर होता है विचलित तो
ये जीवन में उथल पुथल कर देती है
रख धैर्य बढ़ा है जो इसमें
असीम सफलता पायी है
स्वच्छन्द रूप से आने दे उसको
जागीर नहीं है वो तेरी
उसकी अपनी भी परछाई है
कायरता है.........।।

Best Urdu Shayariyan /बेस्ट उर्दू शायरियां


अक्सर अग्यार बहुत होते हैं, हर एक अजब अदाओं के,

 ग़ालिब तो वही होता है जो कुर्बान हो जाये।।1।। 


मोहब्बत जब हो ही गयी तो अब क्या कहना,  

गजी़दा दिल तेरे पास भी जल्दी होगा।। 2।। 


गुजर कर लेते हम तेरे बगैर भी, 

पर सोचा कि तुमसे थोड़ी गुफ्तगू ही कर लूं।। 3।। 


गुफ्तगू हुई है कि गुजारिश हुई,  

तुम्हारे चेहरे पे अज़ब सा सुकून छाया,  

मुद्दतों से ज़ो आंखो में छायी थी आब- ए - तल्ख,  

आब- ए-आइना तेरे चेहरे पर अचानक कहां से आया।। 4।। 


खता जब हमसे हुई तो खुत्बा तूने भी खूब दिए,  

अजीज थे मेरे तुम हर तंज़ सुना बिना उफ तक किए,

आवाज़ह थी इक छोटी सी, पर आसिम करार दिया मुझको ,

बिना सोचे ख्वाबों की खिय़ाबा में खिलती कली को खुश्क कर दिए।।5।। 


आशा-ए-दिल(Aasha e dil)







कुछ खास है वो,
एक मीठा सा एहसास है वो,
वो साथ होती है तो गज़ब का सुकून मिलता है
हर इक पल में खुशियों का हुजूम उमड़ता है,
मानो जी लेता हूँ कयी जिन्दगी एक पल में
बस उसके होने से वही पुराना जुनून उमड़ता है।
जिन्दगी के साथ है वो
जिन्दगी के बाद है वो,
कुछ खास है वो।।1।।
कुछ कहना है मुझे उससे
कुछ कहना है उसे मुझसे
हम दोनों को शायद एक पल की तलाश है
मुझे आज तो उसे कल पर विश्वास है,
इस आज और कल में कितने कल हो गये हैं
पर हम दोनों में आज भी छुपी इक छोटी सी आस है
वो दिन भी इन्तजार में है
ये सुनने को बेकरार है
कि कुछ खास है वो
इक मीठा सा एहसास है वो।। 2।।
                                             -सर्वेश यादव