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मुसाफिरों की चहलकदमी बढ़ रही है
मेरी गली में गर्मी बढ़ रही है
कुछ खास बात है आजकल गली के उस मकान की
मेरी नजर भी आजकल कुछ तिरछी पड़ रही है
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हो जाने दो फैसला जो कुछ भी हो
हम भी हवाओं से उड़ना सीख आए हैं
माना कि चिन्गारियों से आग लगाने का हुनर रखती है वो
हम भी समंदर से दरिया सुखाने का हुनर सीख आयें हैं।।
माना खाक कर सकती है मुझे अपने आगोश में समेट कर
पर हम भी जल जल के बुझनेे का हुनर सीख आयें हैं।।
माना कि दूर से ही वो आग लगा देगी
हो सकता है कि लाखों को वो झुलसा देगीस
मंदर को भी वो सुखाने की कोशिश करेगी बार बार
पर हम भी पानी में आग जलाये रखने का हुनर सीख आयें हैं।।
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सुना है लोग पीके दर्द भुला देते हैंकै
से हैं वो लोग जो खुद को जला देते है
बुजदिल है वो लोग आज तक मैं यही समझता रहा
अब पता लगा है कि शेर दिल है वो जो खुद को सजा देते हैं।।
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ज़हीनों की महफिल है ज़हालत से भरी है
आंख उठाकर देख दुनिया खाली पडी़ है
गुमान था तुझे जिसके पाकीज़ा और नायाब होने का
ध्यान से देख वो उस भीड़ में सबसे आगे खडी़ है।।
-Sarvesh yadav
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