Deshaj | देशज | top motivational poem

                      kavia in video                                       DESHAJ-  34:52'' - 37:17'' 

 

फलक पर सूरज दस्तक दे रहा है

शायद नये सबेरे का आगाज है

उठो शामिल हो जाओ नव निर्माण में

ये तुम्हारी आने वाली नस्लों की अरदास है

उगते सूरज सा तेज रखो तुम

छा विश्व पटल पर चहुँ ओर खुद कीर्तिमान बन जाओ

तपती दोपहरी सा मेहनतकश हो

आंख दिखा न सके कोई वो यशोज्ञान तुम बन जाओ

जड़ता को करके निरामूल तुम क्षमता अपनी पहचानो

कर नाश चराचर अंधकार वो प्रखर ज्ञान तुम बन जाओ

परवान चढ़ो तुम भी चढ़ते सूरज सा

पर अहंकार की छाया को अपनी छाया में न दो विश्राम

हर रोज क्षितिज के पशिचम में सूरज करता घर में विश्राम

हे मानवता के द्योतक सम्पूर्ण चराचर के प्रहरी

तुम ही मानवता तुम ही मानव तुम ही हो गीता के ज्ञान

तुम विश्व धरोहर शांति सरोवर तुम ही सभ्यता के अग्रज हो

तुम ही हो विश्व तुम्ही भारत तुम अपने देशों के देशज हो




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