आसमां रोया है













टूटा है कोई दिल कहीं दूर
आज कोई बेचैन होकर सोया है
बहुत बेब़स रहा होगा वो शख़्स
अकेले में छुप छुप कर रोया है
कोई सूरज अकेला पड़ गया है
कि उसने आज चांद को खोया है
बेतहाशा बेबसी के आलम को महसूस कर लिया उसने
तभी तो आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है।।
भिगो दिया सारी दुनिया को अपने आंसुओं से
गिरफ्त से बाहर आ रहा है उसके गेसूओं से
महताब भी उतना ही बेकरार है शायद
तभी तो कयी रात से बाहर नहीं आया है
आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है............।।
आफा़त था सूरज का कि चांद मुकर गया
ख्वाब जितना भी था सपनों में ही गुजर गया
आराईश महताब की इस कदर बेचैन की
सूरज छुप गया सिर्फ बादलों का साया है
आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है............।।
धुंध भी छाया है बारिश का भी साया है
बादलों के चिलमन में छुपकर कोई देखने आया है
कयामत की रात बन गयी है ये इस कदर
चारों तरफ अंधेरों का सूनसान साया है
मोहब्बत करने में उससे मशगूल रहा इस कदर
टूटा भरम तो दुनिया को खुद से दूर पाया है
आरज़ू थी उसके आगोश में ही जीने मरने की
आशुफ्ता हो गया हूँ खुद को जो उससे दूर पाया है
उसे नहीं पता कि दिल पर कैसा खुमार छाया है
आसमां में बादलों ने अंधेरा बिखेर दिया है
बेबसी देखकर मेरी आसमां ने जमीं को भिगोया है
आज सुबह सुबह ही आसमां रोया है............।।

#आराईश-सजावट
#आशुफ्ता-बौखलाहट
#आफा़त-दुर्भाग्य

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