पत्थर और मैं

एक पत्थर को पिघलाने में मैं खुद ही पिघल गया
चला था उसको बदलने मैं खुद ही बदल गया
उस पर तो ज़रा भी शिकन नहीं आई
पर मेरे चेहरे का हुलिया ही बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने............।।
बड़े शौक से उसे अपने मंदिर में सजा रखा था
उसके दीदार को हर वक्त वक्त बना रखा था
क्या पता था कि एक पल में बिखेर देगा सारे सपने
जिसे मैंने उस खुदा से भी बढ़कर खुदा बना रखा था
थोड़ा सा मुस्कुरा के वो तो यूं ही चले गए
उन्हें क्या पता कि मेरे सारे सपने भी ले गए
अभी तक तो हम सिर्फ मुफ्लिशी ही में जी रहे थे
पर एक ही पल में वो लाचार करके चले गए
सोचता हूं अकेले में तो लगता है कुछ बदल गया
आंख बंद करके जो सपने देखते थे
अब तो नजारा ही बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने........।।
जुनून है शायद यह प्यार का टूटेगा नहीं
कोई कितना भी जोर लगा ले
ये सिलसिला अब रुकेगा नहीं
सजदा सिर्फ उसी का किया है और उसी का ही करूंगा
सिवाय उसके ये सर अब कहीं झुकेगा नहीं
सोचता हूं कि उसकी तस्वीर बना दूं
सोच कर ही दिल दहल गया
बड़ी कोशिशों के बाद जो चेहरा उभर कर आया
करीब आकर देखा तो वो चेहरा बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने.......।।
साजिशों के शिकार तो हम बचपन से होते आए
जहां-जहां फूल लगाया कांटे ही उग आए
अब तो कांटों से दोस्ती सी हो गई है
बार-बार चुभने पर भी  होठों से उफ तक ना आए
शीरी फरहाद हीर रांझा का तो जमाना ही बदल गया
सच में ऐसी मोहब्बत थी या किस्सों का कोई कल गया
मुझ पर रहम खाने की कोई जरूरत नहीं है ऐ जिंदगी
ना ही मैं कल बदला था और ना ही मैं आज बदल गया
एक पत्थर को पिघलाने.............।।
मेरे हाथों में कुछ मर्यादा की ऐसी लकीरें हैं
जिन्हें मिटा नहीं सकता
चाहता हूं सब कुछ उसे बता दूं
बेबसी यह है कि बता नहीं सकता
यह दीवानगी नहीं कि पागल हो जाऊं यह इश्क है
लाख कर ले वो कोशिश पर मैं उसको भुला नहीं सकता सोचता हूं कि कभी ना कभी तो वह कल आएगा
बेचैन तो मैं हूं निसंदेह पर इंतजार में
वो भी बेचैन होगी कभी तो ऐसा कल आएगा
सोचता हूं कि वह कैसे इतना बदल गया
कल तक जो अपना सा लग रहा था
अचानक से बदल गया
सच्चाई नहीं हो सकती है यह यकीन है मुझे
लगता है मानो उसका भी दिल फिसल गया
चाहे तो वह पत्थर सी बना ले खुद को
यकीन है मुझे कहेगी मेरा भी दिल पिघल गया
एक पत्थर को पिघलाने...............।। 

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