तू और तेरी याद


तू और तेरी याद का क्या करूं
न जी पाऊँ न मर पाऊँ मैं क्या करूं
तू हवा के झोंके सी गुजर गयी है इस कदर
रुक जाता हूँ चलते चलते फिर भी पर उड़ता ही रहूँ।।
तुमसे कुछ कहना तो है पर कैसे कहूँ,
काश एक दिन ऐसा भी आ जाये
तुम्हें भी मेरी जरा सी याद आ जाये
तुम भी बेचैन हो इस कदर मेरी याद में
सारी दुनिया को छोड़कर मेरे पास आ जाये
तू भी आके मुझसे ऐसे कह जाये
कि मैं बस तम्हे सुनता ही रहूँ।।
तू और तेरी याद...........।।
अब तो ये दूर रहना सहा नहीं जाता
बिना तुम्हे देखे रहा नहीं जाता
तुम्हारा हाल भी पूछने का दिल बार बार करता है
पर तुम्हारे सामने आ कर कुछ कहा नहीं जाता
तुम्ही कुछ क्यों नहीं बता देते
तुमसे कुछ कहना हो तो कैसे कहूँ
कुछ दिनों की बात होती तो सह लेता
भला सारी जिन्दगी तुमसे दूर कैसे रहूँ
तू और तेरी याद........... ।।
आसमां में मै लटका हुआ हूँ ऐसे
चकोर बारिश के इन्तजार में हो जैसे
क्या पता कि बारिश होगी भी या नहीं
सूख तो नहीं जाऊंगा उन मासूम फूलों के जैसे
तुम्ही बता जाते कि मैं कैसे जियूँ
इन्तजार करना है तो किसका
करूँ तुम्हारा या मौत के इन्तजार में रहूँ
तू और तेरी याद........... ।।
खामोशी मानों जान लेने के फिराक में हो
जंग लगने लगी है ये मोहब्बत भी
मानो जैसे ये भारत नहीं ईराक़ हो
गोलियां चल रही है चारों तरफ से शब्दों की ऐसे
मानो ये शब्द मेरी जान लेने के फिराक में हो
अब तुम ही बताओ ऐसे मैं कैसे सहूं।
बिन तुम्हारे इन अजनबियों में कैसे रहूँ।।
अब तो चले आओ साथ में जीने
अकेले मर तो सकता हूँ पर बिन तुम्हारे कैसे जियूँ
तू और तेरी याद........... ।।



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