Ye teri mahfil


ये तेरी महफिल है मेरा छोड़ जाना ही सही
घुट घुट कर हंसने से बेहतर है दिल का रोना ही सही
यूं तो तुझे जगाने की हर एक मुमकिन कोशिश कर ली
अब सोचता हूं मेरा सो जाना ही सही
इस कदर तुझसे मोहब्बत की खुद को भूल बैठा
आज सोचता हूं तुझको भूल जाना ही सही
तेरे गम में भी मुस्कुराने का दिखावा करता रहा सालों तक
अब सोचता हूं एक बार खुलकर रो देना ही सही
जानता हूं तुझे भुला देना मुमकिन नहीं ताउम्र पर कब तक
सोचता हूं श्मशान में सोकर तुझे भूल जाना ही सही !!

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