अरदास-ए-नबी





नहीं चाहिए मुझे उधार की जिंदगी ,
और ना ही मेहरबानियों के रिश्ते। 
हैरान हूं लोगों के सुलूक को देखकर ऐ जिंदगी, 
काश कि अब चले ही आए मुझे लेने फरिश्ते।। १।। 
अविश्वास और स्वार्थ में डूब चुकी है ये दुनियाँ
शक की निगाहों से अब तो जानवर भी देखते हैं
नहीं जीना ऐसी दुनिया में जहां 
टूट  चुके हैं भरोसे के सारे रिश्ते 
काश कि अब चले ही आए  ...........।। २।।  
क्यों महसूस होता है दर्द मुझे 
क्या अब भी जान कहीं बाकी है 
क्यों नहीं मर जाती सारी संवेदनाएं मेरी 
क्या अब भी मुझ में ईमान कहीं बाकी है
फिर हाशिए पर क्यों है 
मेरी नैतिकता के सारे हिस्से
नहीं जीना मुझे इस दुनिया में 
काश कि अब .................।। ३।। 
प्रेम का भी अजब हाल है इस दुनिया में 
कुछ शर्तों के तो कुछ  वादों के पुलिंदे महज है
 ये प्रेम ये चाहत सब कोरी बकवास है
जरूरत समझो तो साथ 
हकीकत में अकेले जीना ही सहज है
मैं हकीकत हूं नहीं चाहिए मुझे ज़रूरत के रिश्ते
नहीं जी सकता इस दुनिया में 
काश कि अब..............।। ४।। 
यकीं है मुझे फिर भी इस दुनियाँ की काबिलियत पर
ये खुद को बदलेगी जुरूर आदत है इसकी
तलाश में है अभी ये दुनिया और मैं भी  
फर्क बस इतना है  वह क्या ढूंढ रही है उसे पता नहीं, 
पर मैं इंसानियत ढूंढ रहा हूं, 
यकीन है मुझे एक दिन होंगे सपने हम दोनों के सच्चे 
फिर मैं लौट के आऊंगा उस अधूरे अनसुलझे धागे में पिरोने कुछ सच्चे रिश्ते 
नहीं जीना मुझे ऐसी दुनिया में 
काश की अब .........।। ५।। 

                                                 ©  -Sarvesh Yadav

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