Shayari on politics | वो बताता रहा नस्लों का मसीहा खुद को

 


बाग में भौरों के हौसले उडा़न पर थे

पूरी बाग के फूल अपने अवसान पर थे, 

इक इक नशों से रस निचोड़ने में कोई कसर बाकी न छोड़ी

कम अक्ल मासूम फूल लुटकर भी मैदान पर थे!! 

वो बताता रहा नस्लों का मसीहा खुद को

दर्द सहकर भी फूल नस्लों के गुमान पर थे, 

फूलों के गुमराह होने में हवाओं का भी उतना ही कसूर था

जहर घोलती रही फिजाओं में फूल अमृत होने के गुमान पर थे.... 

फूल समझते रहे मधुमक्खियों को नहीं तो क्या भौरों को चुन लूं

डंक सहते रहे फिर भी फूल मधुमक्खियों के मकान पर थे.


Wo kun the | वो कौन थे | शिक्षक | teachers special | भारत में शिक्षा व्यवस्था



सभ्यता जब जब धरा पर उपजी होगी

जब बात उसके आगे बढ़ने की हुई होगी

जब भी मनुष्यता की मानवता जगी होगी

तब तब उसे किसी ने तो राह दिखाई होगी

किसी ने उसे कुछ तहज़ीबें सिखाई होगी

कौन थे वो जो हर रास्तों में आम रहे

कौन थे वो जो गुमनाम रहे

जब जब मानवता पर संकट आया

वो बारिशों में छतरी की भूमिका में आया

सम्मान धन वैभव की लालसा से परे

वो हर क्षण अपनी भूमिका को निभाया

अंधेरे में जलता रहा दिये की तरह 

मनुष्य को रौशनी का मोल समझाया

किरदारों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है जनाब

बताना मुश्किल है किसने हमें इंशा बनाया

आज भी वो हैं क्या कौन हैं क्या हैं वो

आज इंसानों ने उनको कहाँ है पहुँचाया

मेरे हमराजों तो सुनों 

वो मानव की सभ्य पीढ़ी के पहले पर्यवेक्षक थे

हाँ हाँ सही समझे वो शिक्षक थे!! 


बात विचार करने योग्य ये है कि 

अब उनका क्या वो ही स्थान है

संबोधन के शब्द बदले क्या

आज भी उनकी वही पहचान है

ज्ञान के साधन बदले, 

क्या आज भी वही ज्ञान है

मानवता ने बहुत कुछ हासिल कर लिया

सच बताना क्या आज भी उनका वही सम्मान है

फैसला मैं आप पर छोड़ता हूँ , लिबास बदल गये

पर क्या आज भी वही इंसान है....... 


आज का शिक्षक कहते हैं बड़ा हाइटेक हो गया है, 

क्या सच में या महज कागजों में

हमने तो प्राथमिक विद्यालयों की प्राथमिकता देखी है

नियुक्ति शिक्षक के रूप में होती है 

पर पढाने के अलावा सारे काम वो करता है

चुनावों में ड्यूटी तो शिक्षक

अनाज वितरण तो शिक्षक

जनगणना तो शिक्षक

आफिस में क्लर्क का काम तो शिक्षक

आत्मनिर्भर तो इतना की प्यास लगे

तो चपरासी भी शिक्षक

बच्चों को भोजन की व्यवस्था तो शिक्षक

आता तो है सर्व शिक्षा अभियान के लिए पर

पल्स पोलियो अभियान का हिस्सा बनकर रह जाता है शिक्षक

इस बार भी फैसला आप ही करो कि उससे शिक्षा लेनी है या काम

बहुत बदहाली का दौर है शिक्षकों का 

कोई भी मुह उठाकर कुछ भी कह देता है

अरे सरकार इतना पैसा तो दे रही करते ही क्या हैं

दिनभर कुर्सी तोडने के सिवाय.................