मैं तुझमें तू मुझमें चलो एक दूजे में खो जाते हैं
नजर नजर का खेल हुआ दिल में उतर हम जाते हैं
क्या चंदा क्या चांदनी दोनों तो एक ही है
थोड़ा तू मुझमें थोड़ा मैं तुझमें
आओ मिलकर एक हो जाते हैं
मैं अधूरा सा हो गया हूँ
तुझमें ही कहीं खो गया हूँ
ढूँढ रहा था जिन्दगी मैं
तबसे ही तेरा हो गया हूँ
तुझको पता क्या कितना तुझे हम चाहते हैं
मैं तुझमें तू मुझमें.................।।
मैं चंदा तू चांदनी
मैं सुर हूँ तू रागिनी
तू चंचल शीतल पवन का झोका
तू झरनों की वो धारा है
किया कितना तूने मदहोश मुझे
आओ धड़कन दिल की सुनाते हैं
मैं तुझमें तू मुझमें.........।।
नजर नजर का खेल हुआ दिल में उतर हम जाते हैं
क्या चंदा क्या चांदनी दोनों तो एक ही है
थोड़ा तू मुझमें थोड़ा मैं तुझमें
आओ मिलकर एक हो जाते हैं
मैं अधूरा सा हो गया हूँ
तुझमें ही कहीं खो गया हूँ
ढूँढ रहा था जिन्दगी मैं
तबसे ही तेरा हो गया हूँ
तुझको पता क्या कितना तुझे हम चाहते हैं
मैं तुझमें तू मुझमें.................।।
मैं चंदा तू चांदनी
मैं सुर हूँ तू रागिनी
तू चंचल शीतल पवन का झोका
तू झरनों की वो धारा है
किया कितना तूने मदहोश मुझे
आओ धड़कन दिल की सुनाते हैं
मैं तुझमें तू मुझमें.........।।

1 टिप्पणी:
shandaar .....
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